डायरी एंट्री ५- कहानी बचपन वाली
बहुत समय से मैं एक कहानी लिखना चाहता था- कोई एक कहानी बचपन वाली। इसीलिए पिछले दो-तीन हफ्तों से कोई डायरी एंट्री नहीं लिख पाया, क्योंकि बचपन में पढ़ी-सुनी कई कहानियों को याद करने की कोशिश कर रहा था। उन्हीं यादों को जोड़-तोड़ कर ख़ुद की एक कहानी बनाने में व्यस्त था। अंततः कुछ हद तक सफल भी रहा और दो भागों वाली एक कहानी लिख ही डाली। जब हम दोनों भाई छोटे थे तब मम्मी हमें बड़ी ही मज़ेदार कहानियाँ सुनाया करती थीं। मम्मी के पास कहानियों का भण्डार था। कई कहानियाँ जो मम्मी ने अपने बचपन में पढ़ीं थी और कई ऐसी कहानियाँ जो उन्होनें मेरे नाना-नानी से सुनी थीं। उन कहानियों की एक और ख़ास बात यह थी की वे बहुत लम्बी होती थीं। राजा रानी की कहानी, जानी चोर की कहानी, रानी महकदे की कहानी और पता नहीं कौन कौन सी कहानी। छोटी कहानियाँ सुनने में भी मज़ा तो आता था किन्तु यदि कहानी बहुत लम्बी हो तो मज़ा दुगुना हो जाता था। जंगल में खोये हुए राजसी युगल जो कई मायावी राक्षसों से बचते हुए, कुछ भले मानसों की सहायता से अपने महल लौट आते थे...